श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 16: भगवान का शुक्लाम्बर के चावल को स्वीकार करना  »  श्लोक 25
 
 
श्लोक  2.16.25 
প্রভু বলে,—“আজি কেনে সুখ নাহি পাই?
কিবা অপরাধ হৈযাছে কার ঠাঞি?”
प्रभु बले,—“आजि केने सुख नाहि पाइ?
किबा अपराध हैयाछे कार ठाञि?”
 
 
अनुवाद
प्रभु ने कहा, "आज मुझे खुशी क्यों नहीं हो रही? क्या मैंने किसी को नाराज़ किया है?"
 
The Lord said, "Why am I not feeling happy today? Have I offended anyone?"
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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