श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 16: भगवान का शुक्लाम्बर के चावल को स्वीकार करना  »  श्लोक 135
 
 
श्लोक  2.16.135 
তোমার ভোজনে হয আমার ভোজন
তুমি ভিক্ষায চলিলে আমার পর্যটন
तोमार भोजने हय आमार भोजन
तुमि भिक्षाय चलिले आमार पर्यटन
 
 
अनुवाद
"जब तुम खाते हो, तो मैं खाता हूँ। जब तुम भीख माँगने के लिए घूमते हो, तो वह मेरा चलना है।"
 
"When you eat, I eat. When you walk around begging, that's my walk."
तात्पर्य
भगवान अपना पवित्र नाम और भगवान का प्रेम वितरित करने का अपना मिशन वैष्णव त्रिदंडी-सन्यासी के द्वारा पूरा करते हैं जो श्री चैतन्यदेव के आश्रय में भिक्षा मांगने के बहाने चहुँओर घूमते हैं ।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)