श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 15: माधवानंद के अनुभव का वर्णन  »  श्लोक 95
 
 
श्लोक  2.15.95 
এই-মত কত কীর্তি হৈল দোঙ্হার
চৈতন্য-প্রসাদে দুই দস্যুর উদ্ধার
एइ-मत कत कीर्ति हैल दोङ्हार
चैतन्य-प्रसादे दुइ दस्युर उद्धार
 
 
अनुवाद
इस प्रकार वे दोनों भगवान चैतन्य की कृपा से बचाये गये दो दुष्टों के रूप में अत्यन्त महिमावान हो गये।
 
Thus both of them became very glorious as two evil people saved by the grace of Lord Chaitanya.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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