श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 15: माधवानंद के अनुभव का वर्णन  »  श्लोक 78
 
 
श्लोक  2.15.78 
অপরাধ-ভঞ্জনী গঙ্গার সেবা-কার্য
ইহাতে অধিক বা তোমার কোন্ ভাগ্য?
अपराध-भञ्जनी गङ्गार सेवा-कार्य
इहाते अधिक वा तोमार कोन् भाग्य?
 
 
अनुवाद
"गंगा की सेवा करने से तुम्हारे सारे अपराध नष्ट हो जाएँगे। इससे बढ़कर तुम्हारे लिए सौभाग्य की बात और क्या हो सकती है?"
 
"By serving Ganga, all your sins will be destroyed. What could be more fortunate for you than this?"
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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