श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 15: माधवानंद के अनुभव का वर्णन  »  श्लोक 56
 
 
श्लोक  2.15.56 
যাঙ্র অপমান মাত্র জীবনের নাশ
মুঞি দারুণের কোন্ লোকে হবে বাস”
याङ्र अपमान मात्र जीवनेर नाश
मुञि दारुणेर कोन् लोके हबे वास”
 
 
अनुवाद
“आपका अपमान करने से मनुष्य का जीवन समाप्त हो जाता है, तो मुझ जैसा पापी व्यक्ति कहाँ जायेगा?”
 
“If insulting you ends a person's life, then where will a sinner like me go?”
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