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श्लोक 2.15.14  |
নিত্যানন্দ ছাডিল সকল অপরাধ
তথাপি মাধাই চিত্তে না পায প্রসাদ |
नित्यानन्द छाडिल सकल अपराध
तथापि माधाइ चित्ते ना पाय प्रसाद |
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| अनुवाद |
| यद्यपि नित्यानंद ने उसके सभी अपराध क्षमा कर दिए, फिर भी माधाई का हृदय शांत नहीं हुआ। |
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| Although Nityananda forgave all his crimes, Madhai's heart still did not calm down. |
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