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श्लोक 2.15.12  |
আপনে আসিযা প্রভু ভোজন করায
তথাপিহ দোঙ্হে চিত্তে সোযাস্তি না পায |
आपने आसिया प्रभु भोजन कराय
तथापिह दोङ्हे चित्ते सोयास्ति ना पाय |
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| अनुवाद |
| यद्यपि प्रभु स्वयं आये और उन्हें भोजन कराया, फिर भी उनका हृदय शांत नहीं था। |
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| Although the Lord Himself came and fed him, his heart was still not at peace. |
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