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श्लोक 2.13.80  |
কিসের সন্ন্যাসি-জ্ঞান ও-দুঽযের ঠাঞি?
ব্রহ্ম-বধে গো-বধে যাহার অন্ত নাই” |
किसेर सन्न्यासि-ज्ञान ओ-दुऽयेर ठाञि?
ब्रह्म-वधे गो-वधे याहार अन्त नाइ” |
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| अनुवाद |
| "उन दोनों को संन्यासियों का ज़रा भी सम्मान नहीं है। उन्होंने अनगिनत ब्राह्मणों और गायों की हत्या की है।" |
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| "Both of them have no respect for sannyasis. They have killed countless brahmins and cows." |
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