गला-वस्त्र कृतांजलि वैष्णव-निकटे
दन्ते तृण करि' दाँडैबा निष्कपटे
काँड़ियाँ काँड़ियाँ जाँईबा दुःख-ग्राम
संसार-अनल हइते माँगिबा विश्राम
सुनिया अमार दुःख वैष्णव ठाकुर
अमा लागि' कृष्णे आवेदिबेना प्रचुर
वैष्णवा वे आवेदने कृष्ण दयामय
ए-हेना पामर प्रति हबेना सदय
"निष्कपटता के बिना मै दातों में तृण डाले हुए , हाथ जोड़े हुए तथा गले में कपड़ा डालकर एक वैष्णव के पास जाऊंगा। मै रोते हुए उसे अपने कष्टों का वर्णन करूँगा। मै उससे भौतिक अस्तित्व की आग से मुक्ति की भीख माँगूगा। मेरी दुर्दशा के बारे में सुनने के बाद वैष्णव ठाकुर मेरे लिए भगवान कृष्ण से विस्तृत प्रार्थना करेंगे। उनकी प्रार्थना से सर्व दयालु भगवान कृष्ण इस पापी पर दयावान होंगे।"
