श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 13: जगाई और माधाई का उद्धार  »  श्लोक 56-57
 
 
श्लोक  2.13.56-57 
এ দুইযেরে প্রভু যদি অনুগ্রহ করে
তবে সে প্রভাব দেখে সকল সṁসারে
তব হঙ নিত্যানন্দ—চৈতন্যের দাস
এ দুইযেরে করাঙ যদি চৈতন্য-প্রকাশ
ए दुइयेरे प्रभु यदि अनुग्रह करे
तबे से प्रभाव देखे सकल सꣳसारे
तब हङ नित्यानन्द—चैतन्येर दास
ए दुइयेरे कराङ यदि चैतन्य-प्रकाश
 
 
अनुवाद
"यदि भगवान इन दोनों पर अपनी कृपा करें, तो सारा संसार उनकी महिमा को जान जाएगा। यदि मैं उन्हें भगवान चैतन्य का दर्शन करा सकूँ, तो मैं, नित्यानंद, भगवान चैतन्य का सेवक कहलाऊँगा।
 
“If the Lord bestows His grace upon these two, the whole world will know His glories. If I can give them the darshan of Lord Chaitanya, I, Nityananda, will be called a servant of Lord Chaitanya.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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