श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 13: जगाई और माधाई का उद्धार  »  श्लोक 398
 
 
श्लोक  2.13.398 
তথাপিহ এই কৃপা কর মহাশয
শ্রবণে বদনে যেন তোর যশ লয
तथापिह एइ कृपा कर महाशय
श्रवणे वदने येन तोर यश लय
 
 
अनुवाद
हे प्रभु, कृपया मुझ पर अपनी दया बरसाइये ताकि मैं आपकी महिमा सुन सकूँ और उसका गान कर सकूँ।
 
O Lord, please shower Your mercy upon me so that I may hear and sing Your glory.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)