श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 13: जगाई और माधाई का उद्धार  »  श्लोक 366
 
 
श्लोक  2.13.366 
জগাই-মাধাই সমর্পিল সবাঽ-স্থানে
আপন গলার মালা দিল দুই-জনে
जगाइ-माधाइ समर्पिल सबाऽ-स्थाने
आपन गलार माला दिल दुइ-जने
 
 
अनुवाद
भगवान ने भक्तों को जगाई और माधाई सौंपी और फिर उन दोनों को अपनी मालाएं अर्पित कीं।
 
The Lord woke up the devotees and handed over the Madhai and then offered His garlands to both of them.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)