vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Articles
Apps
About
श्री चैतन्य भागवत
»
खण्ड 2: मध्य-खण्ड
»
अध्याय 13: जगाई और माधाई का उद्धार
»
श्लोक 361
श्लोक
2.13.361
মহা-মত্ত দুই প্রভু গৌরচন্দ্র-রসে
সকল গঙ্গার মাঝে নিত্যানন্দ ভাসে
महा-मत्त दुइ प्रभु गौरचन्द्र-रसे
सकल गङ्गार माझे नित्यानन्द भासे
अनुवाद
दोनों प्रभु गौरचन्द्र के प्रेम रस में मग्न हो गए। तत्पश्चात् नित्यानंद गंगा के जल में तैरने लगे।
Both became immersed in the love of Lord Gaurachandra. Nityananda then began swimming in the waters of the Ganges.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×