श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 13: जगाई और माधाई का उद्धार  »  श्लोक 356
 
 
श्लोक  2.13.356 
“সṁহারিমু সকল, মোহার দোষ নাই”
এত বলিঽ ক্রোধে জ্বলে আচার্য-গোসাঞি
“सꣳहारिमु सकल, मोहार दोष नाइ”
एत बलिऽ क्रोधे ज्वले आचार्य-गोसाञि
 
 
अनुवाद
आचार्य गोसाणी क्रोध से जल उठे और बोले, “यदि मैं सभी को नष्ट कर दूं तो इसमें मेरा कोई दोष नहीं होगा।”
 
Acharya Gosani burned with anger and said, “If I destroy everyone, it will not be my fault.”
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)