vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Articles
Apps
About
श्री चैतन्य भागवत
»
खण्ड 2: मध्य-खण्ड
»
अध्याय 13: जगाई और माधाई का उद्धार
»
श्लोक 356
श्लोक
2.13.356
“সṁহারিমু সকল, মোহার দোষ নাই”
এত বলিঽ ক্রোধে জ্বলে আচার্য-গোসাঞি
“सꣳहारिमु सकल, मोहार दोष नाइ”
एत बलिऽ क्रोधे ज्वले आचार्य-गोसाञि
अनुवाद
आचार्य गोसाणी क्रोध से जल उठे और बोले, “यदि मैं सभी को नष्ट कर दूं तो इसमें मेरा कोई दोष नहीं होगा।”
Acharya Gosani burned with anger and said, “If I destroy everyone, it will not be my fault.”
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×