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श्री चैतन्य भागवत
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खण्ड 2: मध्य-खण्ड
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अध्याय 13: जगाई और माधाई का उद्धार
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श्लोक 349
श्लोक
2.13.349
আর-বার জল-যুদ্ধ অদ্বৈত-নিতাই
কৌতুক লাগিযা এক-দেহ—দুই ঠাঞি
आर-बार जल-युद्ध अद्वैत-निताइ
कौतुक लागिया एक-देह—दुइ ठाञि
अनुवाद
अद्वैत और निताई फिर जल-युद्ध में लग गए। वे एक ही हैं, किन्तु क्रीड़ा के उद्देश्य से वे दो हो गए हैं।
Advaita and Nitai again engaged in a water fight. They are one, but for the purpose of play they have become two.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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