श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 13: जगाई और माधाई का उद्धार  »  श्लोक 348
 
 
श्लोक  2.13.348 
গৌরচন্দ্র বলে,—“এক-বারে নাহি জানি
তিন-বার হৈলে সে হার-জিত মানি”
गौरचन्द्र बले,—“एक-बारे नाहि जानि
तिन-बार हैले से हार-जित मानि”
 
 
अनुवाद
गौराचंद्र ने कहा, "एक बार की जीत मायने नहीं रखती। हार-जीत का फ़ैसला तीन मुकाबलों के बाद होता है।"
 
Gaurachandra said, "One win does not matter. The decision of victory or defeat is taken after three matches."
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by acd