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श्लोक 2.13.292  |
যে-রূপে যাহার ঠাঙি আছে অপরাধ
ক্ষমিযা এ দুই-প্রতি করহ প্রসাদ” |
ये-रूपे याहार ठाङि आछे अपराध
क्षमिया ए दुइ-प्रति करह प्रसाद” |
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| अनुवाद |
| “उन्होंने तुम्हारे विरुद्ध जो भी अपराध किये हैं, उन्हें क्षमा करो और उन पर दया करो।” |
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| “Forgive them for whatever wrongs they have committed against you and have mercy on them.” |
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