श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 13: जगाई और माधाई का उद्धार  »  श्लोक 292
 
 
श्लोक  2.13.292 
যে-রূপে যাহার ঠাঙি আছে অপরাধ
ক্ষমিযা এ দুই-প্রতি করহ প্রসাদ”
ये-रूपे याहार ठाङि आछे अपराध
क्षमिया ए दुइ-प्रति करह प्रसाद”
 
 
अनुवाद
“उन्होंने तुम्हारे विरुद्ध जो भी अपराध किये हैं, उन्हें क्षमा करो और उन पर दया करो।”
 
“Forgive them for whatever wrongs they have committed against you and have mercy on them.”
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)