vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Articles
Apps
About
श्री चैतन्य भागवत
»
खण्ड 2: मध्य-खण्ड
»
अध्याय 13: जगाई और माधाई का उद्धार
»
श्लोक 256
श्लोक
2.13.256
জয জয শঙ্খ-চক্র-গদা-পদ্ম-ধর
প্রভুর বিগ্রহ—জয অবধূত-বর
जय जय शङ्ख-चक्र-गदा-पद्म-धर
प्रभुर विग्रह—जय अवधूत-वर
अनुवाद
"शंख, चक्र, गदा और पद्म धारण करने वाले भगवान की जय हो! अवधूतों में श्रेष्ठ, जो भगवान से अभिन्न हैं, उनकी जय हो!
"Victory to the Lord, who holds the conch, the disc, the mace, and the lotus! Victory to the best of the ascetics, who is inseparable from the Lord!
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×