श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 13: जगाई और माधाई का उद्धार  »  श्लोक 25
 
 
श्लोक  2.13.25 
ভব্য-সভ্য-লোক সব হৈল পাগল
নিমাই পণ্ডিত নষ্ট করিল সকল”
भव्य-सभ्य-लोक सब हैल पागल
निमाइ पण्डित नष्ट करिल सकल”
 
 
अनुवाद
"कई शांत और सभ्य लोग इस तरह पागल हो गए हैं। निमाई पंडित ने उन सबको बिगाड़ दिया है।"
 
"Many calm and decent people have gone mad like this. Nimai Pandit has spoiled them all."
तात्पर्य
भाव्य-सभ्य शब्द का अर्थ है "शांतिपूर्ण", "संयमी", "सभ्य", "पवित्र", "कुलीन" या "सभा में बैठने के योग्य"।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)