श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 13: जगाई और माधाई का उद्धार  »  श्लोक 234
 
 
श्लोक  2.13.234 
নিত্যানন্দ-প্রতিজ্ঞা অন্যথা নাহি হয
নিত্যানন্দ-ইচ্ছা এই জানিহ নিশ্চয”
नित्यानन्द-प्रतिज्ञा अन्यथा नाहि हय
नित्यानन्द-इच्छा एइ जानिह निश्चय”
 
 
अनुवाद
"नित्यानंद का निश्चय कभी विचलित नहीं होता। निश्चय जान लो कि यही नित्यानंद की इच्छा थी।"
 
"Nityananda's resolve never wavers. Know for certain that this was Nityananda's wish."
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)