श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 13: जगाई और माधाई का उद्धार  »  श्लोक 232
 
 
श्लोक  2.13.232 
ব্রহ্মার দুর্লভ আজি এ দোঙ্হারে দিব
এ দোঙ্হারে জগতের উত্তম করিব
ब्रह्मार दुर्लभ आजि ए दोङ्हारे दिब
ए दोङ्हारे जगतेर उत्तम करिब
 
 
अनुवाद
"आज मैं उन्हें वह प्रदान करूँगा जो ब्रह्माजी के लिए भी दुर्लभ है। मैं उन्हें इस संसार में सर्वोच्च स्थान पर रखूँगा।"
 
"Today I will grant him what is rare even for Lord Brahma. I will place him at the highest position in this world."
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by acd