भगवान के आदेश पर, नित्यानंद ने माधाई को कसकर गले लगा लिया, जिसके परिणामस्वरूप वह सभी भव-बंधनों से मुक्त हो गई। नित्यानंद ने माधाई के शरीर में प्रवेश किया, और माधाई समस्त शक्तियों से परिपूर्ण हो गई।
At the Lord's command, Nityananda embraced Madhai tightly, resulting in her liberation from all material bondages. Nityananda entered Madhai's body, and Madhai became filled with all powers.
तात्पर्य
भगवान की इच्छा से, श्री नित्यानंद प्रभु ने प्रेमपूर्वक माधाई को गले लगाया, जिसने हमला किया था, और अपनी ऊर्जा का संचार किया। नित्यानंद की ऊर्जा के बल पर माधाई सभी अच्छे गुणों से भर गया। भौतिक भोग की प्रवृत्ति से मुक्त होने और भगवान की सेवा में संलग्न होने के लिए सशक्त होने के बाद, अब वे चयनित छंदों के साथ प्रार्थना करने के योग्य थे।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥