| श्री चैतन्य भागवत » खण्ड 2: मध्य-खण्ड » अध्याय 13: जगाई और माधाई का उद्धार » श्लोक 218 |
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| | | | श्लोक 2.13.218  | নিত্যানন্দ বলে,—“প্রভু, কি বলিব মুঞি?
বৃক্ষ-দ্বারে কৃপা কর—সেহ শক্তি তুঞি | नित्यानन्द बले,—“प्रभु, कि बलिब मुञि?
वृक्ष-द्वारे कृपा कर—सेह शक्ति तुञि | | | | | | अनुवाद | | नित्यानंद ने उत्तर दिया, "हे प्रभु, मैं क्या कहूँ? आपमें तो एक वृक्ष के माध्यम से भी दया करने की शक्ति है। | | | | Nityananda replied, “O Lord, what can I say? You have the power to show mercy even through a tree. | | ✨ ai-generated | | |
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