নিত্যানন্দ বলে,—“প্রভু, কি বলিব মুঞি?
বৃক্ষ-দ্বারে কৃপা কর—সেহ শক্তি তুঞি
नित्यानन्द बले,—“प्रभु, कि बलिब मुञि?
वृक्ष-द्वारे कृपा कर—सेह शक्ति तुञि
अनुवाद
नित्यानंद ने उत्तर दिया, "हे प्रभु, मैं क्या कहूँ? आपमें तो एक वृक्ष के माध्यम से भी दया करने की शक्ति है।
Nityananda replied, “O Lord, what can I say? You have the power to show mercy even through a tree.
तात्पर्य
श्रीमन् नित्यानन्द प्रभु ने महाप्रभु से कहा। "जब देवताओं को कठिनाईयाँ आती हैं तो आप उनकी रक्षा करते हो। जब मनुष्यों को संकट आता है तो आप उनकी रक्षा करते हो। आपके पास पौधों की रक्षा करने की भी शक्ति है, जिनका चेतना का स्तर मनुष्यों जैसा विकसित नहीं है।"
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥