श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 13: जगाई और माधाई का उद्धार  »  श्लोक 217
 
 
श्लोक  2.13.217 
তোমার অঙ্গেতে যেন কৈল রক্তপাত
তুমি সে ক্ষমিতে পার—পডিল তোমাঽত”
तोमार अङ्गेते येन कैल रक्तपात
तुमि से क्षमिते पार—पडिल तोमाऽत”
 
 
अनुवाद
"चूँकि उसने तुम्हें लहूलुहान किया है, इसलिए केवल तुम ही उसे क्षमा कर सकते हो। और अब वह तुम्हारे चरणों में गिर पड़ा है।"
 
"Since he has bled you, only you can forgive him. And now he falls at your feet."
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)