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श्री चैतन्य भागवत
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खण्ड 2: मध्य-खण्ड
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अध्याय 13: जगाई और माधाई का उद्धार
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श्लोक 148
श्लोक
2.13.148
মহাক্রোধে ধাইযা আইল মারিবার
জীবন-রক্ষার হেতু—প্রসাদ তোমার”
महाक्रोधे धाइया आइल मारिबार
जीवन-रक्षार हेतु—प्रसाद तोमार”
अनुवाद
"वे बड़े क्रोध में आकर हमें मारने के लिए दौड़े। आपकी दया से हमारी जान बच गई।"
"They became very angry and ran to kill us. Your kindness saved our lives."
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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