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श्री चैतन्य भागवत
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खण्ड 2: मध्य-खण्ड
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अध्याय 13: जगाई और माधाई का उद्धार
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श्लोक 132
श्लोक
2.13.132
হাসিঽ বলে বিশ্বম্ভর,—“হৈল উদ্ধার
যেই-ক্ষণে দরশন পাইল তোমার
हासिऽ बले विश्वम्भर,—“हैल उद्धार
येइ-क्षणे दरशन पाइल तोमार
अनुवाद
विश्वम्भर ने मुस्कुराते हुए उत्तर दिया, "आपके दर्शन पाते ही वे मुक्त हो गये।"
Vishvambhar smiled and replied, "He was liberated as soon as he saw you."
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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