श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 13: जगाई और माधाई का उद्धार  »  श्लोक 125
 
 
श्लोक  2.13.125 
সে-দুইঽর পাতক কহিতে নাহি ঠাঞি
আপনে সকল দেখ, জানহ গোসাঞি”
से-दुइऽर पातक कहिते नाहि ठाञि
आपने सकल देख, जानह गोसाञि”
 
 
अनुवाद
"उनके पाप कर्मों की कोई सीमा नहीं है। हे प्रभु, आप सब कुछ जानते और देखते हैं।"
 
"There is no limit to their sinful deeds. O Lord, You know and see everything."
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)