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श्री चैतन्य भागवत
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खण्ड 2: मध्य-खण्ड
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अध्याय 13: जगाई और माधाई का उद्धार
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श्लोक 124
श्लोक
2.13.124
সে-দুইঽর ভযে নদীযার লোক ডরে
হেন নাহি, যার ঘরে চুরি নাহি করে
से-दुइऽर भये नदीयार लोक डरे
हेन नाहि, यार घरे चुरि नाहि करे
अनुवाद
"नादिया में हर कोई इन दोनों से डरता है। ऐसा कोई घर नहीं है जिसे इन्होंने लूटा न हो।"
"Everyone in Nadia is afraid of these two. There isn't a house they haven't robbed."
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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