श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 13: जगाई और माधाई का उद्धार  »  श्लोक 109
 
 
श्लोक  2.13.109 
ধাইযা আইলা নিজ ঠাকুরের বাডি
মদ্যের বিক্ষেপে দস্যু পডে রডারডি
धाइया आइला निज ठाकुरेर बाडि
मद्येर विक्षेपे दस्यु पडे रडारडि
 
 
अनुवाद
वे यहोवा के भवन की ओर दौड़े, और वे दोनों दुष्ट मदिरा के नशे में धुत होकर भूमि पर लोट रहे थे।
 
They ran to the house of the Lord, and the two wicked men were rolling on the ground, drunk with wine.
तात्पर्य
जगई और माधाई दोनों ही अतिमदिरा पान करके नित्यानन्द और हरिदास के पीछे दौड़े ।

राड़ारड़ी का अर्थ है, ’’जल्दी चलना’’ या ’’इधर-उधर दौड़ना’’ ।

 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)