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श्लोक 2.12.9  |
আনন্দে মূর্ছিত বা হযেন কোন ক্ষণ
তিন চারি দিবসে ও না হয চেতন |
आनन्दे मूर्छित वा हयेन कोन क्षण
तिन चारि दिवसे ओ ना हय चेतन |
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| अनुवाद |
| कभी-कभी वे प्रेमोन्मत्त होकर बेहोश हो जाते थे और तीन-चार दिन बाद भी उन्हें होश नहीं आता था। |
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| Sometimes he would become unconscious due to love and would not regain consciousness even after three-four days. |
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