श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 12: नित्यानंद प्रभु की महिमा  »  श्लोक 47
 
 
श्लोक  2.12.47 
কেবা কার গলা ধরিঽ করযে রোদন
কেবা কোন্ রূপ করে,—না যায বর্ণন
केबा कार गला धरिऽ करये रोदन
केबा कोन् रूप करे,—ना याय वर्णन
 
 
अनुवाद
कौन किसकी गर्दन पकड़कर रोया या किसने क्या किया, इसका वर्णन नहीं किया जा सकता।
 
Who cried holding whose neck or who did what, cannot be described.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)