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श्लोक 2.12.47  |
কেবা কার গলা ধরিঽ করযে রোদন
কেবা কোন্ রূপ করে,—না যায বর্ণন |
केबा कार गला धरिऽ करये रोदन
केबा कोन् रूप करे,—ना याय वर्णन |
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| अनुवाद |
| कौन किसकी गर्दन पकड़कर रोया या किसने क्या किया, इसका वर्णन नहीं किया जा सकता। |
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| Who cried holding whose neck or who did what, cannot be described. |
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