श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 12: नित्यानंद प्रभु की महिमा  »  श्लोक 46
 
 
श्लोक  2.12.46 
কার গাযে কেবা পডে, কেবা কারে ধরে
কেবা কার চরণের ধূলি লয শিরে
कार गाये केबा पडे, केबा कारे धरे
केबा कार चरणेर धूलि लय शिरे
 
 
अनुवाद
कोई नहीं जानता था कि कौन किस पर गिरा, किसने किसको पकड़ा, किसने किसकी चरण-धूलि अपने सिर पर ली।
 
No one knew who fell on whom, who caught whom, who took the dust of whose feet on his head.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)