श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 12: नित्यानंद प्रभु की महिमा  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  2.12.4 
সবারে দেখিযা প্রীত মধুর সম্ভাষ
আপনা-আপনি নৃত্য-বাদ্য-গীত-হাস
सबारे देखिया प्रीत मधुर सम्भाष
आपना-आपनि नृत्य-वाद्य-गीत-हास
 
 
अनुवाद
नित्यानंद हर किसी से मीठी बातें करते थे। वे नाचते, गाते, वाद्य यंत्र बजाते और हँसते रहते थे।
 
Nityananda spoke sweetly to everyone. He danced, sang, played musical instruments, and laughed.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)