श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 12: नित्यानंद प्रभु की महिमा  »  श्लोक 38
 
 
श्लोक  2.12.38 
কেহ বলে,—“আজি ধন্য হৈল জীবন”
কেহ বলে,—“আজি সব খণ্ডিল বন্ধন”
केह बले,—“आजि धन्य हैल जीवन”
केह बले,—“आजि सब खण्डिल बन्धन”
 
 
अनुवाद
किसी ने कहा, “आज मेरा जीवन सफल हो गया।” किसी ने कहा, “आज मेरे भव-बन्धन नष्ट हो गए।”
 
Someone said, “Today my life has been successful.” Another said, “Today my worldly bonds have been destroyed.”
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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