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श्लोक 2.12.33  |
করিলেই মাত্র এই পাদোদক পান
কৃষ্ণে দৃঢ ভক্তি হয, ইথে নাহি আন” |
करिलेइ मात्र एइ पादोदक पान
कृष्णे दृढ भक्ति हय, इथे नाहि आन” |
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| अनुवाद |
| "जैसे ही कोई उस जल को पीता है, उसमें कृष्ण की दृढ़ भक्ति विकसित हो जाती है। इसमें कोई संदेह नहीं है।" |
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| "As soon as one drinks that water, one develops strong devotion to Krishna. There is no doubt about it." |
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