श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 12: नित्यानंद प्रभु की महिमा  »  श्लोक 25
 
 
श्लोक  2.12.25 
প্রভু বলে,—“এ বস্ত্র বান্ধহ সবে শিরে
অন্যের কি দায—ইহা বাঞ্ছে যোগেশ্বরে
प्रभु बले,—“ए वस्त्र बान्धह सबे शिरे
अन्येर कि दाय—इहा वाञ्छे योगेश्वरे
 
 
अनुवाद
भगवान ने कहा, "इस कपड़े को अपने सिर पर बाँध लो। दूसरों की तो बात ही क्या, बड़े-बड़े योगी भी यही चाहते हैं।"
 
God said, "Tie this cloth on your head. Forget about others, even great yogis want this."
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)