श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 12: नित्यानंद प्रभु की महिमा  »  श्लोक 15
 
 
श्लोक  2.12.15 
আথে-ব্যথে প্রভু নিজ মস্তকের বাস
পরাইযা থুইলেন—তথাপিহ হাস
आथे-व्यथे प्रभु निज मस्तकेर वास
पराइया थुइलेन—तथापिह हास
 
 
अनुवाद
भगवान ने जल्दी से अपने सिर से कपड़ा उतारकर नित्यानंद पर डाल दिया, जिसे देख कर नित्यानंद हंस पड़े।
 
The Lord quickly removed the cloth from his head and placed it on Nityananda, seeing which Nityananda laughed.
तात्पर्य
जब-जब नित्यानंद जी अपने कपड़े उतार कर आनंद में विभोर हो जाते, तब-तब महाप्रभु ने नित्यानंद जी के शरीर पर वही कपड़ा डाल दिया जो स्वयं उनके सिर पर बँधा हुआ था। महाप्रभु के इस व्यवहार पर नित्यानंद जी मुस्कुराए और अपनी बाल्य लीला का भाव प्रकट किया।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)