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श्री चैतन्य भागवत
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खण्ड 2: मध्य-खण्ड
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अध्याय 11: नित्यानंद का चरित
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श्लोक 75
श्लोक
2.11.75
ক্রুদ্ধ হঞা বলে প্রভু,—“মোর দোষ নাঞি”
নিত্যানন্দ বলে,—“প্রভু, এথা নাহি আই”
क्रुद्ध हञा बले प्रभु,—“मोर दोष नाञि”
नित्यानन्द बले,—“प्रभु, एथा नाहि आइ”
अनुवाद
क्रोधित भाव से भगवान बोले, “मेरा कोई दोष नहीं है।” नित्यानंद ने उत्तर दिया, “माता शची यहाँ नहीं हैं।”
The Lord said angrily, “It is not my fault.” Nityananda replied, “Mother Shachi is not here.”
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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