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श्री चैतन्य भागवत
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खण्ड 2: मध्य-खण्ड
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अध्याय 11: नित्यानंद का चरित
»
श्लोक 60
श्लोक
2.11.60
অহর্নিশ ভাবাবেশে পরম উদ্দাম
সর্ব-নদীযায বুলে জ্যোতির্-ময-ধাম
अहर्निश भावावेशे परम उद्दाम
सर्व-नदीयाय बुले ज्योतिर्-मय-धाम
अनुवाद
दिव्य आनंद में लीन, परम तेजस्वी नित्यानंद दिन-रात नादिया में विचरण करते रहते थे।
Immersed in divine bliss, the supremely radiant Nityananda roamed the Nadia day and night.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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