श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 11: नित्यानंद का चरित  »  श्लोक 56
 
 
श्लोक  2.11.56 
হাসে নিত্যানন্দ তান শুনিযা স্তবন
বাল্য-ভাবে বলে,—“মুঞি করিব ভোজন”
हासे नित्यानन्द तान शुनिया स्तवन
बाल्य-भावे बले,—“मुञि करिब भोजन”
 
 
अनुवाद
मालिनी की प्रार्थना सुनकर नित्यानंद मुस्कुराये और बालक के भाव से बोले, “मैं खाऊंगा।”
 
Hearing Malini's prayer, Nityananda smiled and said in a childish tone, "I will eat."
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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