श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 11: नित्यानंद का चरित  »  श्लोक 55
 
 
श्लोक  2.11.55 
তথাপি তোমার কার্য অল্প নাহি হয
যেই কর, সেই সত্য, চারি বেদে কয”
तथापि तोमार कार्य अल्प नाहि हय
येइ कर, सेइ सत्य, चारि वेदे कय”
 
 
अनुवाद
"फिर भी आपके कार्य नगण्य नहीं हैं। आप जो कुछ भी करते हैं वह शाश्वत है और वेदों द्वारा पुष्ट है।"
 
"Yet your actions are not insignificant. Whatever you do is eternal and confirmed by the Vedas."
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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