श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 11: नित्यानंद का चरित  »  श्लोक 54
 
 
श्लोक  2.11.54 
চতুর্দশ-ভুবন-পালন-শক্তি যার
কাক-স্থানে বাটীআনে—কি মহত্ত্ব তাঙ্র?
चतुर्दश-भुवन-पालन-शक्ति यार
काक-स्थाने बाटीआने—कि महत्त्व ताङ्र?
 
 
अनुवाद
"जिसके पास चौदह लोकों का पालन करने की शक्ति है, उसे कौवे से कटोरा वापस लाने में क्या महिमा है?
 
"What glory is there in bringing back a bowl from a crow to one who has the power to rule the fourteen worlds?
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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