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श्री चैतन्य भागवत
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खण्ड 2: मध्य-खण्ड
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अध्याय 11: नित्यानंद का चरित
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श्लोक 38
श्लोक
2.11.38
মালিনী বলযে,—“শুন শ্রীপাদ গোসাঞি
ঘৃত-পাত্র কাকে লৈঽ গেল কোন্ ঠাই”
मालिनी बलये,—“शुन श्रीपाद गोसाञि
घृत-पात्र काके लैऽ गेल कोन् ठाइ”
अनुवाद
मालिनी बोली, "सुनो गोसाणी! एक कौआ घी का कटोरा चुराकर कहीं छोड़ गया है।"
Malini said, "Listen Gosani! A crow has stolen a bowl of ghee and left it somewhere."
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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