श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 11: नित्यानंद का चरित  »  श्लोक 32
 
 
श्लोक  2.11.32 
অদৃশ্য হৈযা কাক কোন্ রাজ্যে গেল
মহা-চিন্তা মালিনীর চিত্তেতে জন্মিল
अदृश्य हैया काक कोन् राज्ये गेल
महा-चिन्ता मालिनीर चित्तेते जन्मिल
 
 
अनुवाद
शीघ्र ही कौआ उड़कर आँखों से ओझल हो गया और मालिनी के हृदय में बड़ी चिन्ता भर गई।
 
Soon the crow flew away and disappeared from sight and Malini's heart was filled with worry.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)