श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 10: भगवान के महाप्रकाश लीला का समापन  »  श्लोक 78
 
 
श्लोक  2.10.78 
অখণ্ড স্মরণ—ধর্ম, ইঙ্হা সবাকার
তেঞি চিত্র নহে, ইহা সবার উদ্ধার
अखण्ड स्मरण—धर्म, इङ्हा सबाकार
तेञि चित्र नहे, इहा सबार उद्धार
 
 
अनुवाद
"इन विभूतियों की विशेषता थी कि वे निरंतर आपका स्मरण करते रहते थे। इसलिए यह कोई आश्चर्य की बात नहीं है कि वे मुक्त हो गए।"
 
"The characteristic of these great beings was that they constantly remembered you. Therefore, it is no surprise that they were liberated."
तात्पर्य
केवल वैष्णव भक्ति ही शाश्वत परम कर्तव्य है। यह सभी के लिए लागू और लाभदायक है। कर्म, ज्ञान, योग, तप और व्रत जैसी अभक्तिपूर्ण गतिविधियों को निम्न धार्मिक सिद्धांतों के रूप में जाना जाता है क्योंकि वे अस्थायी हैं। सांप्रदायिकता और संकीर्ण मानसिकता इन निम्न धार्मिक प्रणालियों के दो ट्रेडमार्क हैं। सर्वोच्च भगवान ही पूजा के एकमात्र पात्र हैं, इसलिए वह अपने विभिन्न लीलाओं को प्रकट करके सभी को उद्धार देते हैं। यह उनका विशिष्ट गुण है।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)