श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 10: भगवान के महाप्रकाश लीला का समापन  »  श्लोक 56
 
 
श्लोक  2.10.56 
সকল অঙ্গনে পডিঽ গডাগডি যায
মহা-শ্বাস বহে ক্ষণে, ক্ষণে মূর্ছা পায
सकल अङ्गने पडिऽ गडागडि याय
महा-श्वास वहे क्षणे, क्षणे मूर्छा पाय
 
 
अनुवाद
हरिदास पूरे आँगन में लोटने लगे। एक क्षण उनकी साँस फूलने लगी, और अगले ही क्षण वे बेहोश हो गए।
 
Haridas began rolling all over the courtyard. One moment he was out of breath, and the next he was unconscious.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)