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श्लोक 2.10.308  |
নিত্যানন্দ-কৃপায সে গৌরচন্দ্র চিনি
নিত্যানন্দ-প্রসাদে সে ভক্তি-তত্ত্ব জানি |
नित्यानन्द-कृपाय से गौरचन्द्र चिनि
नित्यानन्द-प्रसादे से भक्ति-तत्त्व जानि |
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| अनुवाद |
| नित्यानन्द की कृपा से मनुष्य गौरचन्द्र को जान सकता है तथा भक्ति विज्ञान को समझ सकता है। |
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| By the grace of Nityananda, one can know Gaurchandra and understand the science of devotion. |
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