श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 10: भगवान के महाप्रकाश लीला का समापन  »  श्लोक 267
 
 
श्लोक  2.10.267 
শ্রীবাস পণ্ডিত অতি মহা-মহোদার
অতএব তান গৃহে এ সব বিহার
श्रीवास पण्डित अति महा-महोदार
अतएव तान गृहे ए सब विहार
 
 
अनुवाद
श्रीवास पण्डितजी अत्यन्त उदार थे, इसलिए ये लीलाएँ उनके घर में घटित होती थीं।
 
Shrivas Panditji was very generous, hence these Leelas used to happen in his house.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)