श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 10: भगवान के महाप्रकाश लीला का समापन  »  श्लोक 25
 
 
श्लोक  2.10.25 
প্রভু বলে,—“সত্য সত্য এই বর দিল”
মহা মহা জয-ধ্বনি তত-ক্ষণে হৈল
प्रभु बले,—“सत्य सत्य एइ वर दिल”
महा महा जय-ध्वनि तत-क्षणे हैल
 
 
अनुवाद
जब भगवान ने कहा, "मैं तुम्हें निश्चय ही यह वरदान देता हूँ," तो तुरन्त ही "जय! जय!" का एक प्रचण्ड कंपन उत्पन्न हुआ।
 
When the Lord said, "I certainly grant you this boon," there immediately arose a tremendous tremor of "Jai! Jai!"
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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