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श्री चैतन्य भागवत
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खण्ड 2: मध्य-खण्ड
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अध्याय 10: भगवान के महाप्रकाश लीला का समापन
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श्लोक 21
श्लोक
2.10.21
যে-তে ঠাঙি প্রভু কেনে জন্ম নাহি মোর
তথাই তথাই যেন স্মৃতি হয তোর
ये-ते ठाङि प्रभु केने जन्म नाहि मोर
तथाइ तथाइ येन स्मृति हय तोर
अनुवाद
हे प्रभु, मैं कहीं भी जन्म लूं, लेकिन जहां भी जन्म लूं, मुझे सदैव आपका स्मरण रहे।
O Lord, I may be born anywhere, but wherever I am born, I will always remember you.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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